MHD-03 उपन्यास एवं कहानी से संबंधित पाठ्यक्रम है। उपन्यास जीवन को उसकी संपूर्णता में व्यक्त करता है जिसमें बाहरी और भीतरी दोनों ही यथार्थ का महत्त्व होता है। उपन्यास में समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, मनोविज्ञान, मनोविश्लेषण, सौंदर्यशास्त्र सब कुछ समाहित रहता है, जिससे इसके विश्लेषण और मूल्यांकन में बहुविषयक दृष्टिकोण का महत्त्व होता है। उपन्यास अपने आप में बहुविषयक है और जीवन का महाकाव्य है। उसी तरह कहानियाँ भी मानव-जीवन और मानव-चरित्र को उद्घाटित करके लोगों की संवेदना को बढ़ाती हैं और उन्हें मानवीय चेतना से संपृक्त करती हैं। इस पाठ्य क्रम में युगीन वैचारिकी और यथार्थ के आधार पर उपन्यासों और कहानियों का चयन किया गया है, जिससे अतीत एवं वर्तमान के सापेक्ष में भविष्य निर्माण के लिए दृष्टि विकसित होती है। उपन्यास एवं कहानियाँ लोगों को न केवल परिपक्व बनाती हैं, बल्कि अपने युग और अपनी संस्कृति से भी परिचित कराकर जीवन में परिवर्तन का संकेत देती हैं और इस परिवर्तन की दिशा को रेखांकित करके इसपर चिन्तन करने के लिए हमें प्रेरित करती हैं।
MHD-5 साहित्य सिद्धांत और समालोचना का यह पाठ्यक्रम काव्यशास्त्र, आलोचना एवं विचारधाराओं से संबंधित है। यह पाठ्यक्रम काफ़ी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसके अध्ययनोपरांत विद्यार्थी आलोचना के बीज शब्दों और सिद्धांतों से परिचित होता है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों काव्यशास्त्र, साहित्यिक वैचारिकी, साहित्य सिद्धांत आदि को महत्त्व दिया गया है, जो साहित्य के क्षेत्र में रोज़गार की तलाश करने वाले विद्यार्थियों के लिए काफ़ी लाभदायक है। यह पाठ्यक्रम न केवल आलोचनात्मक और समीक्षात्मक दृष्टि विकसित करता है, बल्कि यह सर्जनात्मक कौशल को विकसित करके सर्जनात्मक प्रतिभा में भी वृद्धि करता है। इससे साहित्य के विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं कौशल का विकास होता है और रोज़गार का क्षेत्र भी प्रशस्त होता है।
MHD-15, हिंदी उपन्यास-2 का यह पाठ्यक्रम 4 क्रेडिट का है जो 16 क्रेडिट के मॉड्युल का एक अंग है। इसमें चार उपन्यास रखे गए हैं, जिनके विशेष अध्ययन के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। चारों उपन्यास विशेष विषय-वस्तु के आधार पर चयनित है, जिसमें देश का अतीत, वर्तमान और भविष्य सन्निहित है। ये उपन्यास जीवन को देखने, युग को समझने, मनुष्य बनने और अपनी पारिस्थितिकी को सूक्ष्मता से देखने की दृष्टि विकसित करते हैं। उपन्यास जीवन का महाकाव्य होता है, जिसमें युगीन चेतना, मनोविज्ञान, मनोविश्लेषण, राजनीति, समाज आदि समाहित होते हैं जिससे इसका मूल्यांकन एक रेखकीय नहीं होता है, अपितु इसके मूल्यांकन के लिए बहुविषयक दृष्टि का विकास करना आवश्यक होता है। यह पाठ्यक्रम साहित्य के विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के विकास और उनकी मूल्यांकन की दृष्टि के विकास के लिए निर्मित है।